पश्चिम दिशा (West Direction)

🌅 पश्चिम दिशा (West Direction) – वास्तु शास्त्र के अनुसार

🔱 पश्चिम दिशा का स्वामी देवता: वरुण देव

तत्व: जल

प्रभाव: स्थिर आय, धैर्य, परिश्रम का फल, सामाजिक सम्मान

🏠 पश्चिम दिशा में क्या शुभ है?

✔️ स्टोर रूम / भंडारण कक्ष

✔️ बच्चों का अध्ययन कक्ष

✔️ डाइनिंग एरिया

✔️ बिज़नेस से जुड़ा कार्यालय (स्थिर काम)

👉 पश्चिम दिशा मेहनत के बाद मिलने वाले लाभ को दर्शाती है।

🚫 पश्चिम दिशा में क्या अशुभ है?

❌ मुख्य द्वार (अगर कटाव या दोष हो)

❌ टॉयलेट / सेप्टिक टैंक

❌ किचन (विशेषकर आग से जुड़ा क्षेत्र)

❌ अत्यधिक खुलापन या गड्ढा

🚪 पश्चिम मुखी मुख्य द्वार – सही या गलत?

🔹 अगर पश्चिम में मुख्य द्वार है तो:

द्वार थोड़ा उत्तर-पश्चिम (WNW) की ओर होना बेहतर

दरवाज़ा भारी, मजबूत और साफ़ हो

शाम को द्वार के सामने अंधेरा न रहे

📌 दोष होने पर:

द्वार पर कॉपर/ब्रास स्वास्तिक

पीला या क्रीम रंग

रोज़ शाम दीपक

⚠️ पश्चिम दिशा के दोष के लक्षण

मेहनत के अनुसार पैसा न मिलना

काम बनते-बनते अटकना

बार-बार आर्थिक देरी

पुरुषों को करियर में रुकावट

🛠️ पश्चिम दिशा के सरल वास्तु उपाय

✅ पश्चिम दीवार का रंग: क्रीम, हल्का पीला, मिट्टी रंग

✅ लोहे या भारी अलमारी पश्चिम में रखें

✅ पश्चिम में अनावश्यक पानी न रखें

✅ सूर्यास्त के समय द्वार बंद न रखें

🌟

पश्चिम दिशा खराब नहीं होती,

लेकिन गलत उपयोग इसे दोषपूर्ण बना देता है।

सही संतुलन से यही दिशा स्थिर धन और सम्मान दिलाती है।

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