पश्चिम दिशा (West Direction) – वास्तु शास्त्र के अनुसार
पश्चिम दिशा का स्वामी देवता: वरुण देव
तत्व: जल
प्रभाव: स्थिर आय, धैर्य, परिश्रम का फल, सामाजिक सम्मान
पश्चिम दिशा में क्या शुभ है?
स्टोर रूम / भंडारण कक्ष
बच्चों का अध्ययन कक्ष
डाइनिंग एरिया
बिज़नेस से जुड़ा कार्यालय (स्थिर काम)
पश्चिम दिशा मेहनत के बाद मिलने वाले लाभ को दर्शाती है।
पश्चिम दिशा में क्या अशुभ है?
मुख्य द्वार (अगर कटाव या दोष हो)
टॉयलेट / सेप्टिक टैंक
किचन (विशेषकर आग से जुड़ा क्षेत्र)
अत्यधिक खुलापन या गड्ढा
पश्चिम मुखी मुख्य द्वार – सही या गलत?
अगर पश्चिम में मुख्य द्वार है तो:
द्वार थोड़ा उत्तर-पश्चिम (WNW) की ओर होना बेहतर
दरवाज़ा भारी, मजबूत और साफ़ हो
शाम को द्वार के सामने अंधेरा न रहे
दोष होने पर:
द्वार पर कॉपर/ब्रास स्वास्तिक
पीला या क्रीम रंग
रोज़ शाम दीपक
पश्चिम दिशा के दोष के लक्षण
मेहनत के अनुसार पैसा न मिलना
काम बनते-बनते अटकना
बार-बार आर्थिक देरी
पुरुषों को करियर में रुकावट
पश्चिम दिशा के सरल वास्तु उपाय
पश्चिम दीवार का रंग: क्रीम, हल्का पीला, मिट्टी रंग
लोहे या भारी अलमारी पश्चिम में रखें
पश्चिम में अनावश्यक पानी न रखें
सूर्यास्त के समय द्वार बंद न रखें

पश्चिम दिशा खराब नहीं होती,
लेकिन गलत उपयोग इसे दोषपूर्ण बना देता है।
सही संतुलन से यही दिशा स्थिर धन और सम्मान दिलाती है।
